मालिक बनो

सिविल सर्विसेस से दो लोग रिटायर हुए। एक मालिक बना और एक नौकर।

उसमे से एक व्यक्ति ने रिटायर लेने के बाद अपना बिज़नेस सेटअप किया और उसने मेहनत किया और बिजनेस चल पड़ा।उसने सालाना 200-250 करोड़ का टर्नओवर करने वाले  बन गई।

एक दिन अचानक उसके पास इंटरव्यू के लिए एक व्यक्ति आया। जो की सिविल सर्विसेस में उसके साथ तैयारी करता था।उसने भी उस समय सिविल सर्विसेस से रिटायर ले लिया था।

बिजनेसमैन ने उसको पहचान गया और पूछा:- अरे- अरे तुम यहां कैसे।

कर्मचारी बोला:- में तो जॉब कर रहा था लेकिन वहां पर कुछ समस्या हो गया तो छोड़ दिया और में इंटरव्यू दे रहा हूं।

बिजनेसमैन:- हम दोनों एक साथ सिविल सर्विसेस का तैयारी करते थे।

कर्मचारी:- हां, हां हम दोनों एक साथ सिविल सर्विसेस का तैयारी करते थे।

बिजनेसमैन ने उसको नौकरी पर रख लिया।

कुछ महीने का नौकरी हो गया।

एक दिन जब सारे कर्मचारी चले गए तब

कर्मचारी ने बिजनेसमैन से कहा :- तुमको याद है हम दोनों एक साथ सिविल सर्विसेस का तैयारी करते थे।

बिजनेसमैन बोला :- हां मुझे अच्छी तरह से याद है।

कर्मचारी बोला :- तुमको याद है जब तुम भी 2000 रुपया महीना कमाते थे और मैं भी 2000 रुपया महीना ही कमाते थे।

बिजनेसमैन बोला :- हां, हां मुझे याद है।

कर्मचारी:- उस समय तुम भी नौकर था और मै भी नौकर था।

बिजनेसमैन:- हां, हां मुझे याद है।

कर्मचारी:- पता है आज तुम इस कंपनी के मालिक हो और मैं तुम्हारे कंपनी में नौकर हूं।तुम कितने लक्की हो।

बिजनेसमैन बहुत विन्रम से बोला:- तुमसे मैं इस बारे में बात करना तो नहीं चाहता था। लेकिन तुमको जब बात निकाल ही दिया हैं तो सुनो।

बिजनेसमैन ने बोला:- हम दोनों एक ही जगह पर काम करते थे दोनों 2000 2000  का महीना कमाते थे। सही हैं।

कर्मचारी बोला:- हां।

बिजनेसमैन बोला:- तुमको याद है।25 साल पहले मै और तुम घर से ऑफिस जाने के लिए निकला और तुझे याद होगा एक दिन  1-1.5 किलोमीटर पैदल जाने के बाद अचानक हमको याद आया था कि कमरा का लाइट और फैन चलता छोड़ आया था।तो मै तुमको बोला था हम दोनों चल कर उसको बन्द करके आते है तब तुने मुझसे कहा था 1.5 किलोमीटर जाएंगे फिर 1.5 किलोमीटर वापस आयेंगे 3 किलोमीटर हो जाएगा और 1-1.5 घंटा लग जाएगा और बोला क्या फर्क पड़ता है। बोल कर छोड़ दिया।

लेकिन मैं गया था और लाइट और फैन बन्द करके आया था। याद है।

उस समय रहता था एक कमरा में लेकिन में खुद को उस कमरे का मालिक समझता था और तुम उस समय भी एक कमरा में ही रहता था लेकिन तुम मालिक नहीं नौकर की तरह सोचता था।

मै उस समय मैं नौकर था लेकिन अपने मन में एक मालिक की तरह सोचता था। और मै आज मालिक हूं और मालिक कि तरह सोचता हूं। उस समय भी तुम  नौकर था और आज भी तुम नौकर हो। क्योंकि उस समय भी तुम नौकर की तरह सोचता था और आज भी नौकर की तरह सोचता हैं।


बिजनेसमैन ने कर्मचारी को एक सलाह दिया :- मालिक की तरह सोचो,मालिक बनो। जब तक तुम अपनी नौकर की  सोच को बदल कर मालिक की तरह नहीं सोचोगे तब तक तुम मालिक नहीं बल्कि नौकर ही रहोगे।

मालिक की तरह सोचेंगे तभी मालिक बनोगे।


नजर बदलो, नजारे बदल जायेंगे।

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