निरंतर प्रयास

एक तालाब में बहुत सारे मेंढ़क रहता था। और उस तालाब के बीच में एक धातु का जो राजा में लगता था और वो खंभा बहुत ऊंचा और उसका सतह  चिकना था। 

सारे मेंढ़क उस खंभा पर चढ़ने का प्रयास करता रहता था तो सफल नहीं होता पाता। तो मेंढ़कों ने निश्चय किया

कि क्यों न एक रेस का प्रतियोगिता कराया जाय। जो खंभा के उपर चढ़ेगा उसको विजेता घोषित किया जाएगा।  
रेस का दिन आ गया और आस पास के बहुत सारे प्रतियोगी आ गए और बहुत सारे दर्शक भी आ गए चारों तरफ शोर होने लगा
रेस शुरू हो गईहर तरफ सुनाई देता ये तो बहुत कठिन है। कोई भी इस रेस को पूरा नहीं कर सकता। सफलता का तो सवाल ही नहीं इतने चिकना खंभे पर कोई चढ़ ही नहीं सकता। और यही हो रहा था

जो मेंढ़क प्रयास करता वो थोड़ा उपर जाकर नीचे गिर जाता। कई मेंढ़क 7,8 बार गिरने के बावजूद प्रयास में लगे हुए थे। 

पर भीड़ अभी भी चिललाये जा रही थी ये नहीं हो सकता और वो उत्साहित मेंढ़क भी ये सुन – सुन कर हतास हो गए

और अपना प्रयास छोड़ दिया।

 लेकिन उन्ही मेंढ़कों के बीच एक छोटा मेढ़क था जो बार बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ प्रयास करता रहा…।

और वो उपर चढ़ता रहा अंततः वो खंभे के उपर चढ गया और विजेता बन गया। 

उसकी जीत पर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ। सभी मेंढ़क उस घेर कर खड़े हो गए और पूछने लगे तुमने ये असंम्भव काम कैसे कर दिखाया। तुम्हे अपना लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति कंहा से प्राप्त हुई। जरा हमें भी बताओ तुमने विजय कैसे प्राप्त किया। 
तभी पीछे से आवाज आई अरे भाई उस से क्या पूछते हो वो तो बहरा है। 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अक्सर हम में अपना लक्ष्य प्राप्त करने की काबिलियत होती हैं पर हमारे चारों तरह मौजूद नकारात्मक विचारो की वजह से खुद को कम आंक लेते है। जो हमने बड़े बड़े सपने देखे है बिना उसको पूरा आधे रास्ते से पीछे लौट जाते है। हमें इस बात की जरूरत है कि हमें नकारात्मक विचारों के लिए बहरा और अंधे बन कर अपने सपनों के लिए प्रयास करते रहे और प्रयास तब तक करे जब तक सफलता नहीं मिले। 
कोई काम मुश्किल है,पर असंभ नहीं।

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