खुद पर भरोसा

एक लड़का जो किसान के घर में पैदा हुआ।तो उसके पिता चाहते थे कि वो किसान ही बने खेती करें।

लेकिन वो लड़का सेना में जाना चाहता था और देश के सेवा करना चाहता था। लेकिन वो अपने अपने पिता जी से कहने से डरता था।

एक दिन वो हिम्मत जुटा कर अपने पिता जी से बोला मै किसान नहीं बनाना चाहता हूं।मै सैनिक बन कर देश का सेवा करना चाहता हूं।

तब उसके पिता जी ने बोला ठीक है सेना में ही जाना लेकिन सेना में जाने के लिए तलवार बाजी आना चाहिए।

वो लड़का अगले दिन तलवार बाजी सीखने के लिए एक शास्त्र विद्यालय में गया।पर 10 से 15 दिन के अभ्यास के बाद उसको लगने लगा कि तलवारबाजी उसके वस की बात नहीं हैं।

तब उसने सेना से जुड़ने के लिए उसने उस राज के सेनापति से संपर्क किया जो उसके पिता का दोस्त का रिश्तेदार था।

जब वो लड़का सेनापति से मिला तो सेनापति ने उसको सेना में भर्ती कर लिया लेकिन उसको युद्ध में लड़ने का कोई ज्ञान नहीं था। तो सेनापति ने उसको आरक्षित सेना मे रख दिया।

एक बार कि बात है कि एक भयंकर युद्ध हुआ जिसने आरक्षित सेना को भी जाना पड़ा लेकिन इस लड़का को युद्ध में लड़ने नहीं आता था तो वहां पर से उसको दो तीन साथी ने उसे वहां से किसी प्रकार लेकर युद्ध से बाहर निकला।

और जब शाम हुआ तो वो साथी ने सेनापति से पूछा कि इस लड़का को सेना में क्यों भर्ती किए इसको तो लड़ना ही नहीं आता है।

सेनापति कुछ नहीं बोले और उसको अब सेना निकाल कर उसको पहरेदार की नौकरी में लगा दी।

तब ये लड़का अब सोचने लगा कि कोई मंत्री या राजा से मिलकर अपनी नौकरी बदल ले।और अब उसको वेतन भी कम मिलने लगा था।

एक बार की बात सर्दी का मौसम था और राजा उसी रास्ते से जा रहे थे तब राजा ने देखा कि पहरेदार एक पतली सी पोशाक में सर्दी के मारे कांप रहा रहा है।

तब राजा ने उस पहरेदार के पास आए और बोला तुमको बहुत सर्दी लग रही है।

तब उस लड़का ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई मै बहुत गरीब हूं मेरे पास कपड़े नहीं है आप मेरे जैसे गरीब पर के मदद करें।

राजा ने बोला रुको मै तुम्हारे लिए एक मोटा और गर्म कम्बल भेजता हूं।

राजा जब अपने महल में जाता है तो वो अपने कार्य में लग जाते है और वो पहरेदार की बात भूल जाता है।

सुबह हुआ तो अचानक राजा को याद आया कि मैं तो उस पहरेदार के लिए कम्बल भेजना तो भूल गया ।

तो राजा तुरंत अपने नौकर को बोलता उस पहरेदार को कम्बल दे आओ।

तब नौकर ने राजा से बोला कि वो नौकर ठंड के कारण मर गया।

राजा इस बात पर बहुत दुःखी होता है।उस पहरेदार ने राजा के लिए एक पत्र छोड़ दिया था ।उस पत्र में लिखा था।राजा साहब मै पहले भी इस जैसे सर्दी वाले रात में पहरा देता था लेकिन पहले मुझे कुछ नहीं होता था लेकिन जब आप मुझे कम्बल देने की बात कही तो मुझे और ज्यादा ठंड लगने लगा और इतना ज्यादा ठंड लगने लगा कि अब मै आप लोगो के बीच नहीं रहूंगा।


इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सहारे इंसान को खोखला बना देती है और उम्मीद कमजोर बना देेताI है। हर इंसान को अपने भरोसे से काम करना चाहिए।

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